#पाकिस्तान को #ट्रंप ने दिया बड़ा झटका, #अमेरिका-ईरान डील की मध्यस्थता से किया बाहर, ‘दलाली’ नहीं आई काम
● रिटायर्ड अमेरिकी जनरल और रक्षा विश्लेषक जैक कीन ने ईरान मुद्दे पर पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थ भूमिका पर सवाल उठाए।
● *कीन का दावा:* पाकिस्तान और कतर निष्पक्ष मध्यस्थ नहीं, बल्कि ईरान का पक्ष लेते हैं। ● उन्होंने कहा कि इससे अमेरिका को ईरान के वास्तविक इरादों को समझने में भ्रम हुआ। ● कीन ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान और कतर के प्रभाव ने अमेरिका की कूटनीतिक रणनीति को प्रभावित किया। ● सऊदी अरब पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उसने ईरान के खिलाफ कड़ी सैन्य कार्रवाई का समर्थन नहीं किया। ● दावा किया कि सऊदी अरब ने अमेरिका को अपने एयरबेस और एयरस्पेस के उपयोग की अनुमति नहीं दी। ● कीन के अनुसार, सऊदी अरब ने बार-बार सैन्य कार्रवाई के बजाय बातचीत पर जोर दिया। ● उन्होंने आरोप लगाया कि सऊदी अरब अपने तेल ढांचे और नागरिकों पर जोखिम नहीं लेना चाहता। ● कीन ने कहा कि सऊदी अरब चाहता है कि ईरान का मुकाबला करने का बोझ अमेरिका और इज़राइल उठाएं। ● उन्होंने अमेरिका–सऊदी सुरक्षा संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि वॉशिंगटन ने दशकों तक सऊदी की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ● कीन ने सऊदी नेतृत्व पर राष्ट्रपति ट्रंप का खुलकर समर्थन न करने को “शर्मनाक” बताया।
*ईरान पर हमला पड़ा भारी, अमेरिका की लगभग सभी मिसाइलें खत्म, टेंशन में पेंटागन* ● ईरान के खिलाफ पांच महीने तक चले युद्ध में अमेरिका ने बड़ी संख्या में प्रिसिजन-गाइडेड (सटीक निशाना लगाने वाली) मिसाइलों का इस्तेमाल किया। ● अमेरिकी सेना का #ATACMS और #PrSM जैसी लंबी दूरी की मिसाइलों का भंडार काफी हद तक कम हो गया है। ● इन मिसाइलों का उपयोग जमीन से जमीन पर सटीक हमलों के लिए किया जाता है। ● मिसाइलों के घटते जखीरे ने भविष्य के संभावित संघर्षों के लिए अमेरिका की सैन्य तैयारी को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। ● पेंटागन अब अपने हथियार भंडार को तेजी से फिर से भरने की चुनौती का सामना कर रहा है। ● रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे युद्ध में उच्च-स्तरीय हथियारों की खपत अमेरिका के लिए रणनीतिक चुनौती बन सकती है. ● अमेरिका अब मिसाइल उत्पादन बढ़ाने और रक्षा उद्योग की क्षमता मजबूत करने पर जोर दे रहा है।
*ट्रंप ने फिर किया पाकिस्तान को नजरअंदाज? ईरान वार्ता में सिर्फ सऊदी, #UAE और कतर का लिया नाम* ● अमेरिकी राष्ट्रपति #DonaldTrump ने अमेरिका-ईरान वार्ता में सऊदी अरब, UAE और कतर की भूमिका का जिक्र किया, लेकिन पाकिस्तान का नाम नहीं लिया। ● ट्रंप ने कहा कि इन देशों ने अमेरिका को ईरान पर बड़े सैन्य हमले की बजाय बातचीत का रास्ता अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। ● वार्ता का मुख्य फोकस होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही बहाल करना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों का समाधान है। ● इससे पहले रिटायर्ड अमेरिकी जनरल Jack Keane पाकिस्तान और कतर पर ईरान के प्रति नरम रुख रखने का आरोप लगा चुके थे। ● ट्रंप के ताजा बयान में पाकिस्तान का उल्लेख न होने से उसकी कथित मध्यस्थता पर सवाल उठने लगे हैं।
*दूसरी ओर, ईरान ने ट्रंप के सीधे वार्ता शुरू होने के दावे को खारिज करते हुए कहा कि फिलहाल उसकी बातचीत ओमान के साथ केवल होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री आवाजाही से जुड़े मुद्दों पर हो रही है।















