मेदांता में ज़िंदगी की जंग हार गए सपा के संस्थापक मुलायम सिंह यादव
प्रधानमंत्री, गृहमंत्री सहित सभी नेताओं ने व्यक्त किया दुःख
परिवार, पार्टी और शुभचिंतकों में शोक की लहर
समाजवाद के एक युग का अंत
गोरखपुर। नेताजी के नाम से मशहूर, धरतीपुत्र कहे जाने वाले समाजवादी पार्टी के संस्थापक, संरक्षक और तीन बार उत्तर प्रदेश जैसे बड़े सुबे के मुख्यमंत्री रहे मुलायम सिंह यादव नहीं रहे। उनके निधन से समाजवाद के एक युग का अंत हो गया परिवार और पार्टी ही नहीं बल्कि उनके शुभचिंतकों में शोक की लहर दौड़ गई है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत अन्य शीर्ष नेताओं ने उनके निधन पर गहरी शोक संवेदना व्यक्त की है।


जानकारी के अनुसार नेताजी को यूरिन संक्रमण, ब्लड प्रेशर की दिक्कत और सांस लेने में तकलीफ की वजह से दो अक्टूबर को मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल के डॉक्टरों की माने तो तभी से उनकी हालत नाजुक बनी हुई थी। उनके कई अंगों ने काम करना बंद भी कर दिया था। नौ दिन तक मेदांता के आईसीयू और क्रिटिकल केयर यूनिट (सीसीयू) में जिंदगी और मौत के बीच नेताजी संघर्ष करते रहे और अंततः इस संघर्ष में वह जिंदगी से हार गए, मौत ने विजय प्राप्त की तथा नेताजी ने सोमवार सुबह 8:16 बजे अंतिम सांस ली। 82 साल की उम्र में सोमवार सुबह उनका निधन हो गया।
समर्थकों और पार्टी लाइन से ऊपर उठकर विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़कर काम करने वाले राजनीतिक-सामाजिक कार्यकर्ताओं में शोक की लहर है।
समाजवादी पार्टी के अधिकारिक ट्विटर हैंडल पर मुलायम सिंह यादव के सुपुत्र उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की ओर से नेताजी के निधन की पुष्टि की गई। उन्होंने ट्वीट में लिखा है- ‘मेरे आदरणीय पिताजी नहीं रहे-अखिलेश यादव।’ मुलायम सिंह यादव के निधन की सूचना मिलते ही मेदांता अस्पताल पर उनके समर्थकों, परिवार के नजदीकी लोगों और राजनीतिक नेताओं-कार्यकर्ताओं की भीड़ जुटने लगी है। बड़ी संख्या में आ रहे लोगों को देखते हुए अस्पताल पर सुरक्षा बढ़ा दी गई। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ सहित देश की तमाम राजनीतिक हस्तियां लगातार उनकी सेहत का हाल ले रही थीं। मुलायम सिंह यादव की शख्सयित पार्टी की सीमाओं से पार हर दल और विचारधारा के लोगों को आकर्षित करती थीं। यही वजह है कि सोमवार को उनके निधन के बाद सिर्फ समाजवादी पार्टी नहीं बल्कि हर दल और संगठन में शोक की लहर है।
संघर्षों सैफई से शिखर तक का सफर किया था तय
मुलायम सिंह यादव सन् 1967 में पहली बार विधायक बने थे। वह आठ बार विधायक और 7 बार सांसद रहे। तीन बार यूपी के मुख्यमंत्री और दो बार केंद्र में मंत्री रहे। देश के रक्षा मंत्री रहते हुए मुलायम सिंह यादव ने सीमा पर जाकर सेना का दिल जीत लिया था। मुलायम सिंह सैफई से सत्ता के शिखर तक का सफर बड़े ही संघर्षों के साथ तय किया था।
पहले पहलवानी फिर टीचिंग पेशे को अपनाने के बाद राजनीति में आने वाले मुलायम सिंह यादव कई दलों में रहे। कई बड़े नेताओं की शागिर्दी की लेकिन उसके बाद समाजवादी पार्टी बनाई। उत्तर प्रदेश की सियासत में सियासत की मुख्य कुर्सी पर एक – दो बार नहीं बल्कि तीन बार बैठे। अयोध्या के राममंदिर आंदोलन की जितनी चर्चा भाजपा और उसके नेताओं की हुई उससे ज्यादा नेताजी मुलायम सिंह यादव की होती रही।















