जिलाध्यक्ष पर विश्वासघात का आरोप, 3 पार्षदों से मुलाकात पर लगाई रोक

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जिला कारागार से सपा नेता “डक्कू” ने फेंका ‘लेटर बम’, #सपा की सियासत में भूचाल

*दो #पार्षद की चर्चा तेज़, लेकिन “तीसरा कौन…?

*जिलाध्यक्ष पर विश्वासघात का आरोप, 3 पार्षदों से मुलाकात पर लगाई रोक

*आखिर वह तीसरा कौन हैं 

 

#gorakhpur । जिले की #समाजवादीपार्टी की सियासत में उस वक्त जबरदस्त भूचाल आ गया, जब जमीन कब्जा करने के आरोप में जेल भेजे गए समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता #जफरअमीन “डक्कू” का जिला कारागार से लिखा गया एक पत्र सार्वजनिक हुआ। अपनी ही हस्तलिपि में लिखे इस पत्र के जरिए डक्कू ने न केवल पार्टी संगठन के रवैये पर तीखे सवाल खड़े किए हैं, बल्कि सपा जिलाध्यक्ष और 3 पार्षदों से जेल में मुलाकात करने से साफ इनकार कर दिया है।

 

*’हवाई चप्पल में हुई गिरफ्तारी, जिलाध्यक्ष ने निभाई 2 मिनट की औपचारिकता

जेल की हाई-सिक्योरिटी बैरक में बंद जफर अमीन डक्कू ने पत्र में अपनी गिरफ्तारी का दर्द और जिलाध्यक्ष के प्रति गहरा आक्रोश बयां किया है।

डक्कू ने लिखा कि पुलिस उन्हें कुर्ता तक नहीं पहनने दी और हवाई चप्पल में ही गिरफ्तार कर ले गई। थाने पर पहुंचे जिलाध्यक्ष ने महज 2 मिनट में बहादुरी भरे तेवर दिखाते हुए सिर्फ रजिस्ट्री के कागजात मांगे और बिना कारण या समय जाने वहां से निकल गए।

डक्कू का आरोप है कि उनका मजबूत पक्ष जाने बिना नेताओं की आपात बैठक बुलाई गई, गलत बयान जारी किए गए और जिलाधिकारी से मिलकर केवल औपचारिकताएं निभाई गईं। उन्होंने दो टूक कहा कि संगठन ने उनके साथ विश्वासघात किया है और 7 दिन बीत जाने के बावजूद जिलाध्यक्ष को जेल में 2 मिनट मिलने की फुर्सत नहीं मिली।

डक्कू ने पार्टी नेताओं को सख्त हिदायत दी है कि यह उनका व्यक्तिगत जमीन-मकान का मामला है, इसलिए संगठन का कोई भी नेता इस पर अनाधिकृत बयानबाजी न करे।

*’3 पार्षदों से नहीं करूंगा मुलाकात’— चर्चा में दो पार्षदों के नाम, तीसरा कौन?

पत्र में सबसे ज्यादा हलचल उस लाइन ने मचाई है, जिसमें डक्कू ने जेल प्रशासन को साफ कह दिया है कि वह जिलाध्यक्ष सहित 3 सपा पार्षदों से किसी भी कीमत पर मुलाकात नहीं करेंगे। हालांकि पत्र में पार्षदों के नाम नहीं लिखे हैं, लेकिन राजनीतिक गलियारों में दो चेहरों को लेकर तस्वीर पूरी तरह साफ मानी जा रही है। ज़्यादतर लोग दो पार्षदों की चर्चा कर रहे हैं लेकिन “तीसरा कौन” ये अभी रहस्य बना हुआ है।

बता दें कि साल 2000 में जब डक्कू नगर अध्यक्ष थे, तब उन्होंने जियाउल इस्लाम को मुफ्तीपुर वार्ड से टिकट दिया था। उस दौर में माना जाता था कि वहां से कोई मुस्लिम प्रत्याशी नहीं जीत सकता, लेकिन जियाउल ने जीत दर्ज कर इतिहास रचा और बीते 25 सालों से पार्षद हैं (यह वही वार्ड है जहां से वर्तमान भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी भी सभासद रहे हैं )। बाद में सपा सरकार के दौरान भवन निर्माण को लेकर उपजे विवाद के बाद से दोनों के बीच गहरा शीत युद्ध चल रहा है।

*पार्षद #शहाबअंसारी पूर्व नगर अध्यक्ष रह चुके शहाब अंसारी और डक्कू के बीच का चुनावी व सियासी मतभेद किसी से छिपा नहीं है। पार्टी के अंदरूनी शक्ति संतुलन में दोनों हमेशा आमने-सामने रहे हैं।

*’तीसरा कौन?’ सपा के अंदरूनी खेमे में बेचैनी

दो नाम तय माने जाने के बाद अब समूचे राजनीतिक गलियारे में सिर्फ एक ही सवाल गूंज रहा है—”आखिर तीसरा पार्षद कौन है?”

डक्कू के इस वार ने नगर निगम से लेकर सपा संगठन के कई दिग्गज पार्षदों के माथे पर पसीना ला दिया है। सियासी जानकारों का मानना है कि डक्कू की यह चिट्ठी सिर्फ जेल की चारदीवारी से निकला गुस्सा नहीं, बल्कि गोरखपुर सपा के भीतर सुलग रही गुटबाजी और वर्चस्व की जंग का खुला दस्तावेज है।

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